True friendship- दोस्ती एक रिश्ता है जो निभा दे वों फरिश्ता है

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 friends forever 

True friendship   दोस्ती  दुनिया का सबसे खूबसूरत रिश्ता है ,वो रिश्ता जिसे हम खुद अपने लिए चुनते हैं जब हम पैदा होते है और धीरे – धीरे बड़े होने लगते हैं तो हमें यह बताया जाता हैं कि हमारे मम्मी – पापा ,भाई – बहन ,नातेदार और रिश्तेदार कौन – कौन हैं लेकिन हमने कभी यह नहीं बताया जाता की हमारा दोस्त कौन हैं?

असल जिंदगी मे दोस्ती की शुरूआत तब होती है जब हम पहली बार स्कूल जाना या घर से बाहर खेलना शुरू करते हैं जहाँ हमें बहुत से अन्जान लोग दिखाई देते ,कुछ तो हमारे जैसे ,तो कुछ हमसे बड़े या छोटे ।देखते ही देखते ये अन्जान लोग कब एक दूसरे के करीब आ जाते हैं इन्हें खुद को नहीं पता होता समय के साथ साथ कोई हमारे लिए खास होता जाता हैं ।दोस्ती एक स्वतंत्र रिश्ता हैं जिसने किसी तरह का कोई बंधन नही होता।

दोस्ती एक व्यक्ति के लिए प्रेम,स्नेह और सम्मान की भावना हैं ।दोस्ती एक secondary relationship हैं फिर भी यह life की सबसे important relationship हैं । दोस्ती का रिश्ता कितना खास होता है हम यह इसी बात से समझ सकते है कि हमें अपने friend से कोई बात कहने के लिए किसी खास समय का इंतजार नहीं करना पड़ता ।

हम यह नही सोचते की हमारा दोस्त हमारे बारे मे क्या सोचेगा  या क्या सोचेगी क्यों क्योंकि यह रिश्ता हमारा सगा  या खून का नहीं होता इसमें  किसी तरह का डर नहीं होता । हम अपने दोस्त से कोई भी बात बेफ्रिक होकर कहते हैं। जब दो इंसानों के बीच दोस्ती जैसा खूबसूरत रिश्ता बनता है तो वे एक दूसरे की feelings और emotions को बाटते 

What is true friend ship
True friend
true friendship

 

 हैं उनका सम्मान करते है। इसीलिए यदि किसी भी रिश्ते मे चाहे वह घर मे हो या बाहर दोस्ती वाली feeling डाल दी जाये तो वह रिश्ता और भी मजबूत बनाया जा सकता हैं।

दोस्ती   दो तरह की होती है एक अच्छी और दूसरे बुरी अच्छी दोस्ती अच्छे रास्ते पर और गलत दोस्ती गलत रास्ते पर ले जाती हैं । एक अच्छी और सच्ची दोस्ती हमारे जीवन मे क्या मायने रखती हैं यह मुझे बताने की जरूरत नही हैं ,यह बात तो आप सभी अच्छे से जानते हैं ।

एक सच्चे दोस्त का मिलना मतलब एक सच्चे इंसान का मिलना ।इससे फर्क नही पड़ता की वो लड़का है या लड़की ।सच्चा इंसान जिसे हम खरीद नही सकते,जिसे ढूँढा नही जा सकता जिसे google पर सर्च नही किया जा सकता वो तो जिन्दगी के सफर मे नसीब से मिलते हैं।  

उसके लिए आपका स्टेटस ,रूपया पैसा जाति, रंग रूप कोई मायने नहीं रखती शायद इसीलिए दोस्ती सगे रिश्तों से भी बढ़कर होती हैं ।हम मेहनत से पैसा तो कमा सकते हैं लेकिन मेहनत से एक सच्चा दोस्त नही कमा सकते ।जीवन मे अगर आपको ऐसा एक भी इंसान मिल जाये तो आप अपने आप को खुशनसीब समझीये और उसकी कद्र करीये क्योंकि आजकल के रिश्ते तो मतलब से बनाये जाते है और मतलब पूरा होने पर  खत्म हो जाते  हैं।
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करिये सबसे दोस्ती  –  क्या आपने कभी सोचा अगर यही दोस्ती का रिश्ता हमारे माँ – बाप भाई – बहन के साथ कायम हो जाए तो ,क्या ऐसा हो सकता हैं तो हॉं ऐसा हो सकता हैं पूरी तरह से तो नही लेकिन बहुत हद तक ऐसा हो सकता हैं ।सोचने वाली बात यह हैं की बचपन मे जो माँ – बाप हमारे बिना कुछ कहें ,बिना कुछ बोले ये समझ जाते थे की जमे कब भूख लगी है ,कब प्यास लगी है ,और कब हम खिलौने के लिए रो रहे हैं ऐसे ही न जाने कितनी बाते बिन बोले समझते थे लेकिन जैसे जैसे हम बड़े होते जाते है वैसे वैसे बदलते माहौल के साथ हमारी सोच हमारा नजरिया बदलता जाता हैं ।

आज उसी माँ -बाप से हम यह कहते हैं मम्मी आप नही समझेगी ,पापा आप नहीं समझेगे । आखिर ऐसा क्यों होता हैं ,रिश्ता तो आज भी हमारा उनके साथ हमारा वहीं रिश्ता है जो बचपन मे था फिर हमारे एहसास एक दूसरे के लिए क्यों बदल जाते हैं ?शायद इस सवाल का एक ही जवाब हो सकता हैं कि हम समय और हालात के हिसाब से अपने विचारों को और अपने आप को नहीं बदल पाते दुनिया, समाज मे हो रहे बदलावो को except नही कर पाते और यही से हमारे विचारों मे मतभेद शुरू हो जाता हैं ।

और फिर रिश्ते मे दुरियां आने लगता हैं ।ऐसी समस्या अक्सर उन लोगों या उन माता पिता के साथ आती हैं जो समय के साथ हो रहे बदलावो को except

करे अपनों से प्यार

नहीं कर पाते हैं उन्हें लगता हैं जो रीति  रिवाज रहन सहन,पहनावा उनके समय मे था वही आज के दौर मे भी चलेगा जबकी ऐसा नही है।

आज की lifestyle पूरी तरह बदल चुकी हैं किसी भी समय के जरूरत के हिसाब से बनी चीजें सिर्फ इस समय तक ही रहती हैं । present generation independ life और freedom चाहती हैं और ऐसा हो भी क्यों न ये आज के वक्त की जरूरत हैं ।

 

 जब यही चीजें हमारे बड़ों को गलत लगने लगती हैं तो बच्चो को लगता है कि वो उनको नही समझ रहे है और देखते ही देखते वो उनसे भावनात्मक रूप से दूर हो जाते हैं।ऐसा नहीं है की हमारे माँ पापा या हमारे बड़े बुजुर्ग जो कहते है वो  गलत होता हैं एक इंसान का अच्छा- बुरा उसके माँ – बाप से ज्यादा और कोई नही सोच सकता जरूरत हैं तो सिर्फ उनके नजरिये को समझने की और प्यार से अपनी बात समझाने की यह तभी हो सकता जब दोनों एक दूसरे से अपनी बात बेफ्रिक होकर बिना किसी दबाव के कह सकें ।

माँ – बाप अपने बच्चो से parents की तरह नही बल्कि एक दोस्त की तरह behave करे और बच्चे अपने मां पापा का सम्मान करे उन्हें आदर और प्यार दें।इससे आज के समय की बहुत सारी समस्याएँ हल हो सकती हैं। आप अपने ऱिश्ते मे नयापन और ताजगी महसूस करेंगे ।इसीलिए रिश्ता कोई भी हो उसमें दोस्ती का तड़का लगाना बहुत जरूरी हैं। एक सच्ची दोस्ती हमें कई यादगार और खुशनुमा अनुभव देती हैं । 


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